जांजगीर चाम्पा - अध्यक्ष श्री गोपाल राम जी तथा प्राचार्या श्रीमती अंजल : अघोर विद्यापीठ पोड़ी दल्हा अकलतरा में ‘आपदा प्रबंधन’ विषय पर हुआ एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन।
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta / Sat, Feb 14, 2026 / Post views : 238
अघोर विद्यापीठ पोड़ी दल्हा अकलतरा में ‘आपदा प्रबंधन’ विषय पर हुआ एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन।
अघोर विद्यापीठ पोड़ी दल्हा, अकलतरा में संस्था के संस्थापक परम पूज्य बाबा जी श्री कापालिक धर्म रक्षित राम जी के आशीर्वाद एवं अध्यक्ष श्री गोपाल राम जी तथा प्राचार्या श्रीमती अंजली दीक्षित के कुशल निर्देशन में
दिनांक:14 फरवरी 2026 शनिवार को ‘आपदा प्रबंधन’ विषय पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ।
इस एकदिवसीय कार्यक्रम में जिला जांजगीर चांपा के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाओं ने हिस्सा लिया जिनमें प्रमुख भागीदारी निभाने वाले विद्यालय अघोर विद्यापीठ पोड़ी दल्हा अकलतरा, ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल बनारी जांजगीर, डीएवी पब्लिक स्कूल अकलतरा, जीएलडी पब्लिक स्कूल खैरताल मुख्यमंत्री डीएवी पामगढ़ से आए हुए थे।
सर्वप्रथम सीबीएसई प्रशिक्षण देने आए अतिथिगण श्रीमती अनुराधा वशिष्ठ सेंट फ्रांसिस हायर सेकेंडरी स्कूल अमेरी रोड एवं श्री ओम प्रकाश विश्वकर्मा(एकेडमिक कोऑर्डिनेटर) न्यू एरा प्रोगेसिव स्कूल,कोरबा का स्वागत तिलक लगाकर किया गया तत्पश्चात प्राचार्या श्रीमती अंजली दीक्षित के द्वारा पुष्प गुच्छ एवं पौधा भेंट कर अतिथियों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत ज्ञान की देवी सरस्वती मां एवं पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर उनके समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके सरस्वती वंदना के साथ किया गया। प्राचार्या श्रीमती अंजली दीक्षित के द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों को सम्मानित करते हुए स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया।
प्रशिक्षकों के द्वारा बहुत ही समन्वित वातावरण में प्रशिक्षार्थी शिक्षकों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कुशलता पूर्वक आपदा प्रबंधन क्या है, इसकी आवश्यकता क्यों है, इसका प्रशिक्षण क्यों आवश्यक है और शिक्षक इसमें किस प्रकार से समाज को जागरूक करने में अपना अहम योगदान दे सकते हैं इसके विषय में बड़े ही सहजता पूर्वक उदाहरण के माध्यम से समझाया गया। प्रशिक्षण के प्रथम चरण में आपदा प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षिका अनुराधावशिष्ठ जी ने बताया कि प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाओं के समय होने वाले नुकसान को कम करने, बचाव करने, और पुनर्वास के लिए योजना बनाने की एक समन्वित प्रक्रिया है। इसमें आपदा से पहले की तैयारी, राहत कार्य और बाद के पुनर्निर्माण शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जीवन, संपत्ति और पर्यावरण की सुरक्षा करना है। आपदाओं के प्रकार:
प्राकृतिक आपदा: बाढ़, भूकंप, सूखा, सुनामी, भूस्खलन।
मानवजनित आपदा: रेल दुर्घटना, महामारी, आतंकवाद, औद्योगिक आग आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान किया। प्रशिक्षक ओम प्रकाश विश्वकर्मा जी ने दूसरे चरण में बताया कि आपदा प्रबंधन के कुछ विशेष घटक हैं : जैसे कि पहला ‘रोकथाम’ : आपदा को रोकने के उपाय, जैसे आपदा-रोधी निर्माण।
दूसरा ‘तैयारी’ : लोगों को जागरूक करना, मॉक ड्रिल, और पहले से सुरक्षा योजना बनाना।
तीसरा ‘प्रतिक्रिया’ : आपदा के तुरंत बाद राहत, खोज और बचाव अभियान चलाना।
चौथा ‘पुनर्प्राप्ति’: प्रभावित लोगों को सहायता, बस्तियों को फिर से बसाना और बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण। प्रशिक्षार्थी शिक्षकों ने बड़े उत्साह पूर्वक आपदा प्रबंधन के विषय को समझा एवं अपने अभिनय के द्वारा समस्त गतिविधियों को सबके सामने प्रस्तुत किया कि हम किस तरह से किसी भी आपदा से सहनशीलता के साथ कुछ तकनीक अपनाकर उनसे होने वाले क्षति से बच सकते हैं और अपने कार्य क्षेत्र में बच्चों को इनकी जानकारी प्रदान कर उन्हें सचेत कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान जलपान एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था भी की गई थी। कार्यक्रम के अंत में शिक्षिका श्रीमती कमल शाहदेव के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रशिक्षक श्रीमती अनुराधा वशिष्ठ जी एवं श्री ओम प्रकाश विश्वकर्मा जी,बाहर से आए प्रशिक्षार्थी शिक्षकों, अघोर विद्यापीठ के समस्त शिक्षक गण एवं कर्मचारियों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा।
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta
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