जांजगीर चाम्पा - महतारी वंदन योजना से मिला संबल, प्रधानमंत्री आवास योज : मिट्टी के घर से पक्के आशियाने तक: कोमलबाई की जिंदगी में आया सम्मान और सुकून का उजाला
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta / Tue, Mar 31, 2026 / Post views : 76
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मिट्टी के घर से पक्के आशियाने तक: कोमलबाई की जिंदगी में आया सम्मान और सुकून का उजाला
महतारी वंदन योजना से मिला संबल, प्रधानमंत्री आवास योजना ने दिया सुरक्षित घर
जांजगीर-चांपा 30 मार्च 2026/ नवागढ़ विकासखंड के ग्राम धाराशिव की रहने वाली श्रीमती कोमल बाई चौहान की कहानी सिर्फ एक घर बनने की नहीं, बल्कि संघर्ष, उम्मीद और आत्मसम्मान की कहानी है। कभी मिट्टी और छप्पर से बने छोटे से कच्चे घर में जीवन बिताने वाली श्रीमती कोमल बाई के लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था। बरसात के मौसम में टपकती छत, गर्मी में तपते घर, और ठंड में असुरक्षित माहौल में रात गुजारना ये सब उनके जीवन का हिस्सा था। सीमित आय के कारण पक्का घर बनाना उनके लिए दूर की बात थी।
श्रीमती कोमल बाई बताती हैं कि कई बार ऐसा लगता था कि जिंदगी ऐसे ही गुजर जाएगी, लेकिन मन में एक छोटा-सा सपना हमेशा जिंदा था काश, हमारा भी एक पक्का घर होता। इसी बीच शासन की योजनाओं ने उनके जीवन में उम्मीद की किरण जगाई। महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली राशि ने उनके जीवन को धीरे-धीरे संबल देना शुरू किया। अब वे अपने पोते-पोतियों की पढ़ाई, खान-पान और छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। पहले जहां हर खर्च सोच-समझकर करना पड़ता था, अब उनके चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक दिखाई देती है। वे कहती हैं कि अब किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती, खुद के खर्च खुद संभाल लेती हूं।
साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का घर मिला। जिस जगह कभी मिट्टी का घर था, वहां अब मजबूत दीवारों और पक्की छत वाला सुंदर मकान खड़ा है। यह घर सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उनके सपनों और संघर्षों का परिणाम है। अब कोमलबाई का परिवार निश्चिंत होकर जीवन जी रहा है। बरसात में अब उन्हें रातभर जागकर पानी नहीं समेटना पड़ता, गर्मी में घर �
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta
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